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क्यों जानलेवा हो सकता है डिप्रेशन बिना इलाज के ?
डिप्रेशन एक मानसिक बिमारी है जिससे काफी संख्या में लोग पीड़ित है :- डिप्रेशन की वजह से लोग अकेलापन, खालीपन और कई अलग तरीको की समस्या से गुजरने लगते है जो की बहुत बार नज़रअंदाज़ करी जाती हैं। डिप्रेशन हमारी आम और रोज़ाना की ज़िन्दगी को काफी अलग बना देता है, लोगो के खाने, सोने और दिन्याचार्य सब अव्यवस्थित हो जाती है।
डिप्रेशन एक ऐसी बिमारी नहीं जिसे आप दो बार दवा की खुराक ले कर सही कर लें और निजात पा लें :- लोग सालो साल इस बीमारी से लड़ते रहते हैं वह भी बिना इसे जाने और समझे और बिना ही किसी भी तरीके की मदद के। काफी लोगो को तो यह तक लगता है की डिप्रेशन या फिर मानसिक अवसाद जैसी कोई बिमारी ही नहीं और यह सब एक बहाना है काम से जी चुराने का। लोग समझते हैं वह कुछ दिन अपने आप सही महसूस करने लगेंगे और यही उनकी सबसे पहली और बड़ी गलती साबित होती है।
यह जानना और समझना बहुत जरूरी है :- की मानसिक अवसाद बिना किसी बाहरी मदद के और डॉक्टर के सपोर्ट के जल्दी नहीं जाता। यह खेल का विषय नहीं है। दुनिया का बड़े से बड़ा आदमी मानसिक अवसाद से ग्रसित है और रहा है और उन सब ने मदद ली है किसी न किसी की और खुल कर इस बारे में चर्चा भी करी है।
मानसिक अवसाद को पहचानने के 5 लक्षण ।
- सबसे पहला लक्षण अवसाद का मोह भांग हो जाना होता है। पीड़ित को किसी भी कार्य में मन लगाने में दिक्कत होती है और उसका कुछ भी करने का जी नहीं चाहता है। वह न तो अपने परिजनों से मिलना चाहता है ना ही किसी के भी साथ समय व्यतीत करना चाहता।
- अवसाद और व्यग्रता लोगो को एक साथ परेशान करती है! इनके लक्षण है हार्ट रेट का बढ़ना, बहुत ज्यादा पसीना आना, घबराहट, किसी भी स्थिती को नए नजरिए से देखने में असमर्थ होने। चिढ़, हर चीज से दूर भगाना, और कहीं का गुस्सा कहीं और निकलना ये सब लक्षण ज्यादा तर आदमियों में पाए जाते हैं।
- सबसे आम लक्षण आशाहींन हो जाना है। पीड़ित व्यक्ति को हर चीज़ बदलाव से परे लगती है और उसे लगता है की कोई भी ख़राब चीज़ कभी नहीं बदल सकती और उसे आस पास सब कुछ बेकार हैं।
- अवसाद से पीड़ित व्यक्ति के मन में किसी भी चीज़ का कोई दार नहीं होता हैं। और इसी सोच के साथ वह एक लापरवाही भरा जीवन व्यतीत करने लगता हैं। वह नशेड़ी, गंजेड़ी, जुआरी और तेज़ वाहन चलने जैसी हरकतें करने लगता हैं बिना अंजाम की परवाह किये।
- एक स्वस्थ दिमाग का आदमी हर वक़्त आत्मविश्ववास से परिपूर्ण रहता है परन्तु एक मानसिक अवसाद से घिरा हुआ व्यक्ति खुद को धीमे-धीमे नापसंद करने लगता है। कई बार तो यह इस कदर बढ़ जाता है की वह खुद को चोट पहुंचाने लगते है केवल खुद को अच्छा महसूस कराने के लिए।
1. रुचि का नष्ट होना :
2.चिंता और चिढ़न :
3.निराशाहीन भावना:
4.अथाह लापरवाही :
5.खुद से ही घृणा करना :
यह अवसाद का एक मुख्य लक्षण है। व्यक्ति ख़ुद को हर चीज़ के लिए असमर्थ समझने लगता है।
एक्सपर्ट्स की मदद लें ।
मानसिक अवसाद एक ऐसी बिमारी है जो बढ़ते वक़्त के साथ अपनी जड़ें मजबूत करती जाती है :- इसका इलाज़ उपलब्ध है पर यह ज़रूरी है की समाज की परवाह किए बगैर ही आप हिम्मत करके किसी जानकार और इस समबन्ध में एक्सपर्ट की सलाह लें जैसे की साइकोलोजिस्ट या फिर साइकेट्रिस्ट।
अवसाद से पीड़ित व्यक्ति डिप्रेशन के जाल में इतना फंस जातें है :- की कई बार वह अपनी जान देना ही उचित समझते हैं बिना यह सोचे की उनके परिजनों को इस बात से कितना आघात पहुंचेगा। डिप्रेशन का इलाज हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। यह बाकी आम बीमारियों की तरह नहीं होता जो एक ही दवा से सही होगा। अलग लोगों के बीमार पड़ने का अलग कारण होता है इसी वजह से लोगों का इलाज भी अलग अलग तरीकों और दवाइयों से होता है।
- पीड़ितों को इस थरेपी की जरिये सकारत्मक सोच की तरफ जागरूक किया जाता है और उनके मन से नकारात्मक सोच दूर करी जाती है। इसमें अवसाद ग्रसित पीड़ित का नजरिया दुनिया और उसके इर्द गिर्द होते है चीज़ों के प्रति और भी जागरूक और आशाजनक किआ जाता है। कोगनीटिव बिहेवियर थरेपी काफी असरदायक होती है उसका फ़र्क़ भी कुछ ही दिनों में सामने आ जाता है। अगर इस थरेपी में बताई हुई चीज़ों को ताउम्र ध्यान रखा जाए तो अवसाद कभी भी लौट के नहीं आता और व्यक्ति एक सामान्य और सुखी जीवन व्यतीत करता है। हर व्यक्ति और उसकी दिक्कत और सोचने का नजरिया अलग होता है इसी वजह से डॉक्टर इस थरेपी को हर पेशेंट के अनुरूप इस्तेमाल में लाता है।
- इसे मनोचिकत्सा के नाम से भी पुकारा जाता है। इसमें पीड़ित के विचारधारा और उसकी सोच पे ज्यादा ध्यान दिया जाता है। उसकी मन की भावना, छुपी हुई इच्छा और आकांक्षाओं को समझा जाता है। मनोचिकित्सक उन्हें उनकी सोच और उनकी पाराकाष्टाओं से अवगत करता है और उसे खुद में विश्वास करने की और अग्रसर करता है। मेडिकल में कई अलग प्रकार की सयकोडेनमिक चिकत्सा है जैसे की- ब्रीफ सयकोडेनमिक थरेपी, फैमिली सयकोडेनमिक थरेपी, अवं म्यूजिक/आर्ट थरेपी।
- इसमें अवसाद पीड़ित के उनके जीवन में अन्य लोगों से समबन्ध पे ध्यान केंद्रित किया जाता है और उसे समझा जाता है। इस थरेपी का उपयोग पीड़ित को अपनी मन की बात कहने और समझने की तरफ प्रेरित किया जाता है। पीड़ित को लोगों से घुलने मिलने और समाज का हिस्सा बनने की और भी प्रेरित कियाजाता हैं। चिकित्सक न केवल रोगी को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगा जो अवसाद के लिए योगदान दे रहे हैं, बल्कि उन्हें इससे निपटने में भी मदद करते हैं।
- ये समझा ज़रूरी है की अवसाद एक क्लीनिकल बिमारी है जिसमे कई बार दवाईओं के प्रयोग से हमारे हार्मोन्स को कंट्रोल किया जाता है। इसमें सेरोटोनिन, एंटी डेप्रेस्सेंट और कई अन्य तरह की टेबलेट्स दी जाती है जिससे हार्मोन के बिगड़ते हुए बैलेंस को सही किया जा सके।
कोगनीटिव बिहेवियर थरेपी :
सयकोडेनमिक थरेपी :
अंतर्वैयक्तिक चिकित्सा :
दवाई चिकित्सा :
अवसाद से खुद को दूर रखने के 8 आसान तरीके ।
1.व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित करें ।
बहुत से लोग ज़रूरत से ज्यादा बड़े लक्ष्य निर्धारित कर के फिर जब उन्हें पूरा नहीं कर पाते हैं तो अवसाद का शिकार हो जाते हैं। आप अपना लक्ष्य तभी पूरा कर आएंगे जब :-
- आपका लक्ष्य असल जीवन से मेल खाएगा। एक बार ऊंची छलांग लगाना किसी के लिए भी संभव नहीं है।
- लक्ष्य ऐसा निर्धारित करें जिसे पूरा करने का आपके पास वक़्त हो।
- आपका लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो आपके करने से हो ना की किसी दूसरे के कन्धों पर जा कर टिक जाए।
- अपने लक्ष्य को हर तरीके से जांचें और परखें और देखें की अपनी म्हणत के साथ आप अपने लक्ष्य के रोज़ कितने करीब आ रहे।
- लक्ष्य ऐसा हो जो आपको फ़ायदा पहुंचाए न की जो पूरा होने के बाद किसी काम का ना रहे।
- अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक समय निर्धारित कर लें और फिर उसी अनुसार अपना काम करें।
- वक़्त के साथ अपना कदम बढ़ाएं और खुद को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की हिम्मत दें।
- चिकित्सक ज्यादातर पीड़ितों को ऐसा उद्देश्य रखने को बोलते हैं जिस तक वह आसानी या थोड़ी मेहनत के साथ हासिल कर पाएं।
- अपने आप पर विश्वास रखने से ही आप सब कुछ हासिल कर सकतें हैं, इस बात का सदैव ध्यान रखें|
2. अपना समय कुदरत के साथ बिताए ।
प्रकृति में समय व्यतीत करना आपके मूड को बढ़ाने और तनाव, अवसाद और चिंता को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है :- वाइल्डरनेस थेरेपी प्रोग्राम्स का अन्य चिकित्सीय लाभों के अलावा दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पुरे वक़्त घर के चार दीवारी में कैद रहने से भी व्यक्ति के स्वाभाव में चिड़चिड़ापन और उत्साह की कमी हो जाती है। खुले वातावरण में और हरियाली में शरीर को ताज़ी हवा भी मिलती है और साथ में मन को सुकून भी।
हवा में टकराते पत्तों की खनखनाहट और चिड़ियों की आवाज़ से पीड़ित को कई तरीके से थ्रेपुटिक फायदे मिलते है :- जैसे इन सब आवाज़ों से शरीर में कोर्टिसोल लेवल का बढ़ जाना और थोड़ा अच्छा महसूस करना। रोज़ाना दिन में आधे घंटे की सैर भी शरीर से नकारात्मकता को दूर करने में काफी कारगर साबित होती है। आप साइकिल चला सकते है या फिर ट्रेक के लिए भी किसी रास्ते पे जा सकते हैं। बस ध्यान रखें की पुरे दिन में एक बार तो काम से काम प्रकृति की गोद में कुछ समय व्यतीत करें।
3. स्वेच्छा से सेवा ।
यह साबित करने के लिए सबूत तो नहीं है कि स्वयंसेवक कार्य किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को मजबूती देता है :- यह अवसादग्रस्तता के लक्षणों में सुधार करता है और व्यक्ति को आशावादी महसूस करता है। दूसरों के साथ सार्थक नियमित सामाजिक संपर्क एक समर्थन प्रणाली विकसित करने में मदद करता है। इसके अलावा, जब आप नियमित रूप से स्वयंसेवा करते हैं, तो यह जीवन में उपलब्धि और उद्देश्य की भावना देता है। यह आत्म-सम्मान में सुधार करता है और आप दूसरों की मदद करने के लिए सराहना और आवश्यकता महसूस करते हैं।
अपने कौशल और रुचियों के आधार पर, आप स्वयंसेवक का काम चुन सकते हैं :- यह बुजुर्गों को भोजन देना, बच्चों को पढ़ना, आश्रय गृह में मदद करना आदि हो सकता है। वास्तव में, जानवरों के साथ काम करने से मूड में सुधार होता है और चिंता और तनाव कम होता है। अवसाद नकारात्मक विचारों का कारण बनता है जो व्यक्ति की सोच को दुर्बल कर सकते हैं। स्वेच्छा से हम खुद को एक ऐसे सकारात्मक क्रिया में धकेल देते हैं जिससे उदास मनोदशाओं और नकारात्मक विचारों का चक्र टूट जाता है। दूसरों की मदद करने से आपकी भावनाओं और विचारों का चक्र बदल जाएगा। इन सकारात्मक विचारों को अन्य तरीकों से अनुभव करना मुश्किल है। स्वेच्छा से आपको अपने जीवन को बदलने, चिंताओं और अवसाद को कम करने का अवसर मिलेगा।
4. संगीत सुनें ।
अवसाद हमारी रोज़ाना ज़िन्दगी को काफी उथल पुथल देता हैं :- इससे बचने के लिए ज़रूरी है की हम ऐसे कार्य करें जिनसे हमारा मन अच्छा रहे और सकारात्मक रहे। आप चाहे तो बाहर घूमने जाए, ट्रेक करें, या फिर आप पेंटिंग करें। ऐसे ही म्यूजिक थरेपी भी अवसाद को दूर करने में बहुत कारागार साबित होती है। गाने सुनने के प्रभाव से हमारे होर्मोनेस में भी बदलाव होते है जिसका असर सीधा हमारे दिमाग पे पड़ता हैं! अच्छे गाने का अच्छा असर, और बुरे का बुरा। इसीलिए, अच्छे गाने सुने और उनसे खुद को अच्छा महसूस करवाए।
2011 में फिन्निश शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध में ये पता चला है :- की म्यूजिक थरेपी से अवसाद पीड़ितों में काफी सुधार पाया गया है। म्यूजिक थेरेपी डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए जानी जाती है। संगीत सुनने का मनोवैज्ञानिक प्रभाव व्यापक और शक्तिशाली हो सकता है। संगीत एक सशक्त माध्यम है जो न केवल किसी व्यक्ति का मनोरंजन करता है और प्रेरित करता है, बल्कि यह शक्तिशाली मनोवैज्ञानिक प्रभाव के साथ एक आराम, खुश और प्रेरित भी बनाता है।
5. अपनी नियमित दिनचर्या बनाएं ।
शरीर को स्वस्थ रहने के लिए कई तरह की विटामिन, मिनरल और व्यायाम की ज़रूरत होती हैं ;- शरीर को सुन्दर एवं स्वस्थ रखने के लिए उसका सक्रिय होना ज़रूरी हैं। लोगों का मूड आंतरिक और बाहरी कारकों से प्रभावित होता है। शोध से पता चला है कि कुछ नियमित आदतों का अभ्यास करने से स्वाभाविक रूप से अवसाद से लड़ने में मदद मिल सकती है। अगर आप गलत समय पर सो कर उठते हैं और अपना खान पान नियम अनुसार नहीं लेते तो आप अपने शरीर के साथ मन को भी अस्वस्थ कर रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने अपने शोध में इस बात का उल्लेख भी किआ है :- की नियम का पालन करने से तन और मन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं। किसी एक या उपरोक्त सभी स्तरों में कुछ को शामिल करने से हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रोज़ सुबह उठ कर हलके म्यूजिक के साथ ध्यान लगाए, योग करें या फिर जिम जाएं!
6. अच्छा और स्वास्थ्य वर्धक भोजन खाएं ।
अवसाद को ठीक करने के लिए कोई जादुई आहार नहीं है, फिर भी यह सुझाव दिया जाता है :- कि आप किस तरह का भोजन खाते हैं। अवसाद के लक्षणों को कम करने के लिए बेहतर पोषण प्रमुख है। पर इस बात के प्रमाण हैं कि खाद्य पदार्थ जो कि ओमेगा 3 और फोलिक एसिड से समृद्ध होते हैं वो अवसाद से लड़ने में काफी हद तक मददगार होते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड से हमारे दिमाग की सेल्स बनती है।
शोधकर्ताओं के हिसाब से जिन देशों में ओमेगा 3 रिच खाना कहते है लोग, वहां अवसाद के कम रोगी पाए जाते हैं :- ये भी कहा गया है की अवसाद से बचने के लिए मीठा कम खाना चाहिए क्युकी इससे हमारे ब्रेन में इंफ्लेमेटरी होर्मोनेस बनते है अवसाद के लक्षण बढ़ने लगते है। मीठे से हमारे अच्छे होर्मोनेस भी कम बनते है, इसीलिए जितना हो सके इससे दूर रहना चाहिए। फ़िर भी अपने आहार में कोई बड़े बदलाव करने से पहले चिकित्सक का प्रमार्श जरूर लें।
7. व्यायाम ।
यह देखा गया है कि नियमित व्यायाम दिनचर्या का पालन करने से चिंता और अवसाद के लक्षणों में सुधार होता है :- और उदास व्यक्ति बेहतर महसूस करता है। ऐसा देखा गया हैं की जो लोग रोज़ व्यायाम करते हैं वो ज्यादा स्वस्थ और अवसाद से दूर रहते हैं। शारीरिक कसरत के बाद फील-गुड एंडोर्फिन और मस्तिष्क के अन्य रसायन से सेहत में सुधार होगा। किसी को अभिवादन करना या अपने आस-पड़ोस में घूमने के दौरान मुस्कान का आदान-प्रदान करना निश्चित रूप से आपके मूड को बढ़ावा देगा।
शरीर में जब एनर्जी ज्यादा हो जाती है उसे निकलने का साधन नहीं मिलता तो लोगो में व्यग्रता बढ़ जाती है :- व्यायाम से शरीर स्वस्थ भी रहता है और उसकी ऊर्जा को भी निकलने का रास्ता मिलता है। रोज़ हफ्ते में 3घंटे से 5 घंटे का व्यायाम भी आपको आत्मविश्वास बढ़ने में काफी फ़ायदा दे सकता है।
8. अपनी नींद जरूर पूरी करें ।
हमारा मूड और नींद आपस में जुड़े हुए हैं नींद एक स्वस्थ शरीर के लिए काफी ज़रूरी है :- जब हम सोते है तो हमारे शरीर और दिमाग को आराम मिलता है। जो इंसान पूरी नींद नहीं लेता उसमे अवसाद बढ़ने के ज्यादा लक्षण होते हैं। आधी नींद या फिर काम नींद से हमारी मनोस्थिति पे काफी असर पड़ता है और हम धीरे धीरे अवसाद की और बढ़ते जाते हैं।
अगर आपका शरीर आराम करेगा तभी स्वस्थ रह सकता हैं :- मंद रोशनी का उपयोग करना, किताब पढ़ना या आराम की गतिविधि में लिप्त होना आपको बेहतर नींद में मदद कर सकता है। रात को अच्छी नींद लेना अवसाद को प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण है। एक आराम करने वाले व्यक्ति के पास अधिक ऊर्जा होगी और चीजों पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होगा।
अवसाद का ईलाज करने के अन्य तरीके ।
डिप्रेशन के इलाज में ज़रूरी नहीं की आप दवाएं ही लें। और भी अन्य उपाय है इससे निजात पाने के :
- अच्छा मसाज हमारे कोर्टिसोल लेवल को काम करने में सहायक होता हैं। जब कोर्टिसोल लेवल कम होता तो हमारे सेरोटोनिन लेवल्स 28 % बढ़ जाते हैं। और हमारा शरीर खुद को और खुश रखने की कोशिश करता है और कामयाब भी रहता है।
- रोज़ाना ध्यान लगाने के कई फायदे हैं। यह हमारी एकाग्रता को बढ़ता है और चिंता को भी दूर करता है। रोज़ ध्याम लगाने से हमारे शरीर में साड़ी हीनता दूर होती है और हम शान्ति का अनुभव करते हैं।
- अकुपंक्चर साइंस द्वारा जाना समझा एक ऐसा तरीक है जो यह साबित कर चूका है की इसे उपयोग से अवसाद को बहुत हदों तक काम किआ जा सकता है। अकुपंक्चर शरीर और दिमाग दोनों को साथ में आराम देता है।
- गहरी सासें लेना, अरोमाथेरपी, व्यायाम, सैर सपाटा, ये सब और कई तरीके है जिनकी मदद से आप खुद की मदद कर सकते हैं अवसाद से निजात पाने में! स्वस्थ रहे, खुश रहे।
मसाज थरेपी :
मैडिटेशन :
अकुपंक्चर :
रिलैक्स होने के तरीके :
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मानसिक अवसाद एक बिमारी है,हिम्मत करके किसी जानकार और एक्सपर्ट की सलाह लें।
डिप्रेशन के इलाज में ज़रूरी नहीं की आप दवाएं ही लें। और भी अन्य उपाय है जो आपकी डिप्रेशन से निजात पाने में सहायक होंगे जैसे गहरी सासें लेना,अरोमाथेरपी, व्यायाम, सैर-सपाटा, ये सब तरीके है,जिनकी मदद से आप खुद की मदद कर सकते हैं और अवसाद से दूर रह सकतें है। इसका इलाज़ उपलब्ध है पर यह ज़रूरी है की समाज की परवाह किए बगैर ही आप हिम्मत करके किसी जानकार और इस समबन्ध में एक्सपर्ट की सलाह लें। स्वस्थ रहे, खुश रहे।